कुल 4 लाख से ज्‍यादा भिखारी, एक जगह ऐसी भी जहां केवल दो

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भारत में चार लाख 13 हजार 670 भिखारी हैं। दो लाख 21 हजार 673 इनमें पुरुष हैं, जबकि एक लाख 91 हजार 997 महिलाएं हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल में भिखारियों और बेघरों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है। तकरीबन चार लाख भिखारियों में 81 हजार सिर्फ पश्चिम बंगाल में रहते हैं। लेकिन एक जगह ऐसी भी है, जहां सिर्फ दो भिखारी हैं। यह जगह लक्षद्वीप है। ये सारे दावे हम नहीं कर रहे हैं। बल्कि ये केंद्र सरकार कह रही है। बुधवार (21 मार्च) को सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने ये जानकारी लिखित में जारी कीं। मंत्री की ओर से ये आकंड़े लोकसभा को लिखे गए एक पत्र में जारी किए गए हैं, जो 2011 की जनगणना के अनुसार हैं। उत्तर प्रदेश का नाम इस सूची में 65 हजार 835 भिखारियों के साथ दूसरे नंबर पर है, जबकि 30 हजार 218 भिखारियों संग आंध्र प्रदेश इसमें तीसरे पायदान पर है। केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे कम भिखारी रहते हैं। सरकारी की रिपोर्ट के मुताबिक, लक्षद्वीप में महज दो भिखारी हैं। दादर नगर हवेली में 19, दमन और दीयू में 22 और अंडमान और निकोबार द्वीप पर सिर्फ 56 बेघर हैं। उधर, नई दिल्ली और चंडीगढ़ में भिखारियों और बेघरों की संख्या बढ़ी पाई गई। देश की राजधानी में दो हजार 187 भिखारी हैं। वहीं, खूबरूरत घरों के शहर में 121 भिखारी रहते हैं। इसी बीच पिछड़े वर्गों के लिए काम करने वाली एक संस्था ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) से अपील की है कि खानाबदोश, भिखारियों, घुमंतू जाति और अनधिसूचित जनजातियों सरीखी श्रेणियों को अन्य पिछड़ा वर्ग के ‘अ’ समूह में शामिल करे। अक्टूबर में पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को उप-समूहों में विभाजित करने के लिए एक आयोग का गठन किया था, ताकि समुदाय के सबसे पिछड़े लोग आरक्षण से अधिक से अधिक लाभान्वित हो सकें। बैकवर्ड क्लासेस (बीसी) कल्याण संघ के अध्यक्ष आर.कृष्णैया ने इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है।

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