खनोड़ा में महाराणा प्रताप की जयंती के उपलक्ष में रैली व कार्यक्रम का आयोजन

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सुनील दवे, समदड़ी 

बाड़मेर टाइम्स नेटवर्क 

-कुछ लोग हार कर भी जीत जाते है, कुछ लोग जीत कर भी हार जाते, नही दिखते है अकबर के ताबूत कही पर…लेकिन, राणा के घोड़े अक्सर हर चौराहे पर नजर आते है- नरपतसिंह उमरलाई

पाटोदी- निकटवर्ती खनोड़ा ग्राम में सर्व समाज द्वारा हिंदवा सूरज वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 478वीं जयंती के उपलक्ष में स्थानीय विद्यालय में जयंती व गांव में रैली का आयोजन कर धूमधाम से मनाई।

समाज सेवी व करणी सैनिक शक्तिसिंह राठौड़ ने खनोड़ा में बताया कि सर्व समाज द्वारा हिंदवा सूरज वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की भव्य रैली ग्राम के मुख्य मार्गो से होते हुए नारो के साथ कार्यक्रम स्थल पहुंची। भव्य कार्यक्रम में पाटोदी ठाकुर साहब हनुवंतसिह, बायतु विधायक कैलाश चौधरी, श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना जिला संयोजक नरपतसिंह उमरलाई, जिला सरंक्षक अमरसिंह पाटोदी, संगठन मंत्री महेंद्रसिंह उमरलाई, गजेंद्र करण करणोत बागावास, पाटोदी अध्यक्ष सवाईसिंह नवातला, श्याम खारवाल, अशोक जैन को साफा व केसरिया दुपट्टा, माला पहनाकर बहुमान किया गया।

कार्यक्रम में बायतु विधायक कैलाश चौधरी ने महाराणा प्रताप, वीर तेजाजी, वीर दुर्गादास से प्रेरणा लेने की बात कही। उन्होने कहा कि राजस्थान का इतिहास गौरवशाली रहा है। यहाँ कई वीर योद्धाओं ने जन्म लेकर अपनी वीरता से राजस्थान का नाम गौरवान्वित किया है। जिन्होंने देश व हिन्दू धर्म के लिए अपना जीवन तक न्यौछावर किया है। राजस्थान के ऐसे बीर शूरमाओं से आज कि युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।

करणी सेना जिला संयोजक नरपतसिंह उमरलाई ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप एक ऐसा योद्धा था। जिन्होंने अपने देश के लिए महलो के ऐशों-आराम को छोड़कर जंगलो में रहकर घास की रोटियां खाई पर मुगलों की अधीनता स्वीकार नही की। उमरलाई ने कहा कि युवाओ को महाराणा प्रताप, वीर दुर्गादास, वीर तेजाजी महाराज जैसे महापुरूषों की जयंतियां मनानी चाहिए और उनको अपने जीवन मे उतारकर प्रेरणा लेनी चाहिए। विक्रम सोनी ने कार्यक्रम का मंच संचालन व बाहर से आये मेहमानो का आभार, धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर महावीर जैन, बहादुर सिंह, जोगसिंह चौहान, कन्यालाल सुथार, घेवर सुथार, भेरपुरी, चेनपुरी, सूरजपुरी रेवतपुरी, देव सेन, किशनपुरी, सुरेश सुथार, अशोक सुथार, भूरा राम सुथार, कुलदीपसिंह, नरेंद्रसिंह राठौड़, गणपत जैन, भैरूलाल जैन, महेन्द्रसिंह, लुम्बाराम आदि ग्रामीण मौजूद रहे।

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