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अवैध खनन करने से छलनी हो रहा है आलम नगरी धोरीमन्ना का पहाड़, जिम्मेदार मौन

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नरेश राव, धोरीमन्ना

बाड़मेर टाइम्स नेटवर्क

धोरीमन्ना- आलम नगरी के नाम से विख्यात धोरीमन्ना पहाड़ चारों तरफ से खनन माफियाओं द्वारा छलनी किया जा रहा है। साता सड़क मार्ग के पास पचास फीट गहरे खड्डे में खनन हो रहा है। सड़क मार्ग नजदीक होने के कारण कभी भी भयानक हादसा हो सकता है। मामले मे खनिज विभाग की नजर होते हुए भी कारवाई नहीं कर सरकार को राजस्व नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अवैध खनन से पुरा पहाड़ी क्षेत्र खोखला हो रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि अब इस पहाड़ को जेसीबी मशीन, हिटाची और बारूद से तेज विस्फोट कर उड़ाया जा रहा है। धमाको की आवाज उपखंड कार्यालय व आस-पास ग्रामीणों इलाको तक सुनाई देती है। लेकिन, प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। इससे पूर्व ग्रामीणों की शिकायत पर तहसीलदार के आदेश पर प्रशासन द्वारा संयुक्त कारवाई में टैक्टर, मशीन, औजार जब्त किये गए थे लेकिन, खनन माफियाओं की राजनीतिक पहुंच के चलते मामला दर्ज नही हो पाया और जब्त संसाधन छोड़ दिये गए। कितनी खान लीज का आवंटन किया गया है, इसकी जानकारी किसी अधिकारी के पास नही है। रोजाना विस्फोट की गूंज प्रशासन के कानो तक आसानी से सुनाई देती है। तेज ब्लासटिंग के बाद पहाड़ी खोखली होने पर हथोड़े, टाकले ओर सांग के माध्यम से रोज सुबह से खोदना शुरू कर देते है और दिनभर यही क्रम चलता है। टैक्टर में लादकर शहर सहित आसपास के बाजार में बेचने के लिए लाद दिया जाता है।

अवैध खनन से छीन रहा जानवरों का आवास

धोरीमन्ना कस्बे के गोद में अवैध खनन का खेल सालों से चला आ रहा है पहाड़ का सीना छलनी कर के अवैध खनन माफिया सालों से अपनी जेब भर रहे है। लेकिन, माफियाओं का यह खेल पहाड़ में रेन-बसेरा कर रहे जानवरों पर खासा भारी पड़ रहा है। पहाड़ी की गोद में रहने वाले वन्यजीव, जानवरों को अवैध खनन के चलते पलायन करना पड़ रहा है।सरकार के तमाम नियमों के बावजूद भी अवैध खनन पर रोक लगाना संभव नही हो पा रहा है।

पहाड़ छोड़ने को मजबूर हो रहे वन्यजीव, जंगली जानवर

धोरीमन्ना की पहाडियों में सालों से अवैध खनन चल रहा है। अवैध खनन के चलते पर्यावरण का संतुलन तो बिगड़ रहा है साथ ही साथ बेशकीमती जड़ी-बूटियां, पेड़ पौधे व जंगली जानवरों तक का अस्तित्व सिमटने लगा है। धोरीमन्ना में जहां जहां भी तेज़ी से खनन हुआ है वहां जंगली जानवर, वन्यजीव चिंकारा, लोमड़ी, लकड़बग्गा, सियार, खरगोश, पाटा गोह, नीलगाय, गिद्ध सहित कई प्रजातिंया पहाड़ी से निकलकर तेजी से विलुप्त होने की कगार पर है। पिछले कुछ महीने से तीन बार तेंदुआ अरावली भटक कर शहर की पहाड़ी की तरफ आया था लेकिन, खनन के चलते आस-पास ग्रामीण इलाकों पहुंच कर छह लोगो को घायल कर दिया था। पहाड़ के सीने को जब तक छलनी होने से रोका नहीं जाएगा तब तक जंगली जानवरों की सुरक्षा भी नहीं हो सकती। प्रशासन खनन माफियाओं पर किस तरह लगाम लगा कार्रवाई करता है या नही समय ही बतायेगा।

बेधड़क दिया जा रहा खनन को अंजाम

हैरानी की बात है कि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बार-बार प्रशासन, पुलिस, विभिन्न विभागों सहित मुख्यमंत्री को भी इस बारे में शिकायत की जा रही है बावजूद इसके आज तक कोई भी ठोस कार्रवाई अमल में नही लाई गई है। जिसके चलते धंधे से जुड़े लोग बेधड़क होकर खनन को अंजाम दे रहे है। साथ ही रायल्टी की चोरी कर राजस्व नुकसान पहुंचा रहे है।

प्रतिदिन यहा से बड़ी मात्रा में पत्थर सैकड़ों ट्रक टिप्पर व टैक्टरों में लोड कर दूसरे क्षेत्रों में निजी निर्माण कार्य व ठेकेदारों द्वारा उपयोग मे लाये जा रहा है।

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