नई समर्थन मूल्य घोषणा मोदी सरकार का नया जुमला- पूर्व सांसद चौधरी

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बाड़मेर टाइम्स ब्यूरो 

-चार वर्ष बाद घोषणा, वो भी आने वाली सरकार के भरोसे

बाड़मेर- एआईसीसी सचिव एवं पूर्व सांसद हरीश चौधरी ने केन्द्रीय केबिनेट द्वारा आगामी वर्ष के लिए खरीफ की 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की मंजूरी देने को लागत पर पचास प्रतिशत मुनाफे की जुमलेबाजी बताया है। पूर्व सांसद ने कहा कि वर्ष 2014 में चुनावों के समय भारतीय जनता पार्टी एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों को उनकी फसल की लागत का पचास प्रतिशत मुनाफा न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप मे देने का वादा किया था। लेकिन चुनावों के चार वर्ष से अधिक समय बाद भी किसान को न तो समर्थन मूल्य मिला है, न ही कर्ज से मुक्ति मिली, और ना उसकी मेहनत और परिश्रम की कीमत। न ही खाद, कीटनाशक दवाईयों, बिजली, डीजल की कीमतों में कमी हुई।

पूर्व सांसद हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा बुधवार को घोषित समर्थन मूल्य किसानों को लागत एवं पचास प्रतिशत मुनाफे की घोषणा को कहीं भी पूरा नहीं कर रहा है। राजस्थान में बहुतायत मे होने वाली फसल मूंग का उदाहरण लिया जाय तो 5700 रूपये लागत एवं पचास प्रतिशत मुनाफा कुल रूपये 8550 समर्थन मूल्य होना चाहिए लेकिन 6975 रूपये तय किया गया है। पूर्व सांसद ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2017-18 के लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों को एक वर्ष बाद के लिए वर्ष 2018-19 के लिए लागू करने की स्वीकृति दी है। जबकि पिछले एक साल में कृषि कार्यों की लागत में भारी वृद्धि हुई है। इस तरह सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ किसानों के मजदूरी व परिश्रम, खाद बीज, मशीनरी, सिंचाई, जमीन का किराया आदि सब कृषि लागत में मानकर उसके उपर मुनाफा देने का वादा करती है लेकिन केबिनेट की नई घोषणा से किसानों के लिए ये सब मोदीजी के जुमले ही नजर आ रहे हैं।

एआईसीसी सचिव हरीश चौधरी ने कहा कि मई 2014 में डीजल की कीमत 56.71 रूपये प्रति लीटर थी और अब ये लगभग 14 रूपये बढ़कर 70 रूपये से उपर हो गई है। खाद की कीमते पिछले छः माह में पचीस प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसके अलावा कृषि कार्याें में उपयोग होने वाले खाद, दवाईयों से लेकर ट्रैक्टर तक देश के इतिहास में पहली बार मोदी सरकार ने टेक्स लगा दिये हैं, इस तरह कृषि लागत लगातार बढ़ती जा रही है।  पूर्व सांसद हरीश चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सही में मंशा किसानों को लागत एवं पचास प्रतिशत मुनाफा देने की होती तो पिछले चार वर्षों में देश के किसानों को उनकी मेहनत का 20 हजार करोड़ रूपये मिल जाता।

पूर्व सांसद ने कहा कि केन्द्र सरकार ने चार वर्ष तक किसानों के लिए कुछ नहीं किया और ना ही चुनावी वादों पर अमल किया और अब बड़े राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों एवं दस माह में लोकसभा चुनाव को देखते हुए समर्थन मूल्य की स्वीकृति दी है और ये नई घोषित कीमतें भी अगली सरकार द्वारा दी जायेगी। क्योंकि खरीफ 2019 की फसलें बाजार में आने तक देश में आम चुनाव हो जायेंगे और नई सरकार आ जायेगी। ऐसे में सरकार का यह कदम किसानों को बरगलाने के लिए सोची समझी रणनीति के तहत लिया गया प्रतीत हो रहा है।

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