बाड़मेर मे बेटियों ने पिता की शवयात्रा को दिया कंधा, हर शक्स की आँखें हुई नम

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बाड़मेर टाइम्स ब्यूरो 

-पिता की अंतिम इच्छा थी कि मरणोपरांत बेटियाँ दें शवयात्रा को कंधा 

बाड़मेर- समाज में मौजूद रूढ़ीवादी परंपराओं को तोड़ते हुए जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित रानीगांव में दो बेटियों ने न केवल अपने पिता के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा में उन्हें कंधा दिया, बल्कि उनके अंतिम संस्कार के समय उन्हें मुखाग्नि भी दी।

रानीगांव के कविराज शिवनाथसिंह व उनकी पत्नी रेखा कंवर के बेटे नहीं होने के कारण उनकी सेवा के लिए उनकी ही दो बेटियां आगे आई और दोनों बेटियों ने अपने पिता की सेवा कर उन्हें बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी। उन्होंने अपनी बेटियों के कंधे पर अंतिम संस्कार व मुखाग्नि की इच्छा बेटियों के समक्ष जताई थी। गुरुवार को दोनों बेटियों ने पिता की बैकूंठी को कंधा दिया तो हर शख्स की आंखें नम हो गईं। पिता को मुखाग्नि देते हुए बेटी फफक कर बस इतना बोली कि पापा..हमें अकेला छोड़ गए। उन्होंने समाज में बेटियों को आगे बढ़ने के लिए एक नई मिसाल दी है, ताकि समाज में बेटी को भी बेटों के बराबर का दर्जा मिल सके।

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