परमहंस स्वामी ने किए रूपादे माता व जसोल माजीसा के दर्शन

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बाड़मेर टाइम्स नेटवर्क 

-गीता ही मानव मात्र का धर्म शास्त्र- स्वामी अड़गड़ानन्द 
जसोल-  यथार्थ गीता के प्रणेता परमहंस स्वामी पूज्य अड़गड़ानन्द महाराज ने मालानी की तपोभूमि माता रूपादे मंदिर पालिया धाम व जसोल स्तिथ माता राणी भटियाणी मंदिर पहुंच भारत वर्ष के मंगल की कामना की। स्वामी अड़गड़ानन्दजी महाराज के पालिया धाम में पहुँचने पर राणी भटियाणी मंदिर संस्थान की ओर से स्वागत किया गया। महाराज के साथ बच्चा महाराज सहित अनेक संतो ने भी दर्शन किए। जसोल माता राणी भटियाणी मंदिर दर्शन पश्चात मंदिर ट्रस्ट द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया और ट्रस्ट के द्वारा किए कार्यों पर महाराज ने रावल किशनसिंह जसोल को आशीर्वाद दिया। वही कुंवर हरीशचंद्रसिंह ने महाराज को रूपादे माता के मंदिर निर्माण करने वाले कारीगरों से मिलाया तथा विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
परमहंस स्वामी ने आमजन को अपने जीवन में यथार्थ गीता को पढ़ने व मनन करने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि गीता के अनुसार जो पुनर्जन्म का कारण है वह वासनाएं हैं और जो परमात्मा को मिलाता हैं उस नियतविधि कर्म का आचरण ही पूण्य कर्म हैं। तत्व स्थित महापुरुष सद्गुरु में श्रद्धा उस परमात्मा को विदित करने का तरीका हैं। मानव मात्र की सेवा करना ही परोपकार हैं, मानव के जीवन में सुख दुःख हमेशा आते रहते हैं उसे देख घबराना नही चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए तथा क्षत्रिय धर्म के विषय पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि यथार्थ गीता के अनुसार अगर मनुष्य चलने लगेगा एवं ईश्वर पथ पर भजन चिंतन करने का प्रयास करेगा तो धीरे-धीरे समाज में फैली हुई कुरीतियां भेद भाव, ऊंच नीच छुआछूत की जो दरारे पड़ी हुई हैं वो समाप्त होने लगेगी। इसी के साथ फैली सामाजिक भ्रांतिया, धर्म क्या हैं? कर्म क्या हैं? यज्ञ क्या हैं ? वर्ण क्या हैं ? इन सभी प्रश्नों का समाधान यथार्थ गीता के अध्ययन से मिल जायेगा। गीता ही मानव मात्र का धर्म शास्त्र हैं। भगवान कौंन हैं ? भगवान की भगवता क्या हैं ? भगवान की प्राप्ति कैसे सम्भव हैं ? और कृपा कैसे मिलेगी? इन सभी बातों के बारे में जानकारी देते हुए यथार्थ गीता का अध्ययन करने की बात कही। गीता की देन हैं कि सत्य केवल एक ईश्वर, आत्मा या परमात्मा हैं। विश्व के सभी महापुरुष एक हैं और सभी ने एक ईश्वर और उसकी प्राप्ति के धर्म सिद्धान्तों की अपने अपने देश काल की भाषाओँ में समझाया हैं।
सत्संग के दौरान क्षत्रिय युवक संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर, गम्भीरसिंह जसोल, गजेंद्रसिंह, शोभसिंह असाड़ा, विशनसिंह मेवानगर, भंवरसिंह वरिया, भेरूसिंह टापरा, गणपतसिंह, सूरजभानसिंह दाखां, लालसिंह असाड़ा, मांगसिंह जागसा, अर्जुनसिंह कालेवा उपस्थित थे।

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