27 दिन में नौ बार ट्रेनें बेपटरी, बस 5 फीसदी लोगों के काम आएगी बुलेट ट्रेन

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने गुरुवार (14 सितंबर) को अहमदाबाद से मुुंबई जाने वाली बुलेट ट्रेन की आधारशिला रखी। एक लाख 10 हजार करोड़ लागत से बनने वाली इस ट्रेन को लेकर विपक्षी दलों के नेता, मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स पर तंज कसे जा रहे हैं। लोग आम ट्रेनों की सुरक्षा और समय से देरी से चलने के हवाले देकर इस ट्रेन के लिए मोदी सरकार को ताने मार रहे हैं। डाटा वेबसाइट इंडिया स्पेंड के अनुसार पिछले 27 दिनों में ट्रेनों की पटरी से उतरने की नौ घटनाएं हो चुकी हैं। जिस दिन पीएम मोदी और पीएण आबे बुलेट ट्रेन की आधारशिला रख रहे थे उस दिन भी जम्मूतवी-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का गॉर्ड का डिब्बा पटरी से उतर गया था। हालांकि दुर्घटना में कोई घायल नहीं हुआ। इंडिया स्पेंड के अनुसार साल 2016-17 में 78 बार भारतीय ट्रेनें पटरी से उतर चुकी हैं। ट्रेनों के पटरी से उतरने से हुई इन दुर्घटनाओं में 193 लोग मारे जा चुके हैं। वेबसाइट के अनुसार ये संख्या पिछले 10 सालों में सर्वाधिक है। भारतीय रेल में हर दिन दो करोड़ से ज्यादा लोग सफर करते हैं। हालांकि ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में पिछले 10 सालों में कमी आई है। साल 2007-08 में कुल 194 ट्रेन दुर्घटनाएं हुई थीं जबकि साल 2016-17 में कुल 104 दुर्घटनाएं हुईं। साल 2017 के पहले छह महीनों में 29 रेल दुर्घटनाएं हुईं जिनमें से 20 ट्रेनों को पटरी के उतरने के कारण हुई थीं। इन दुर्घटनाओं में 39 लोग मारे गये थे और 54 घायल हुए। पिछले 10 साल में भारत में कुल 1394 ट्रेन दुर्घटनाएँ हुई हैं जिनमें से 51 प्रतिशत (708) ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण हुईं और इनमें 458 लोग मारे गये। पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने राज्य सभा में ट्रेन हादसों से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा था कि भारत में ट्रेन हादसों की दर कम हुई है। प्रभु ने बताया था कि साल 2006-07 में प्रति 10 लाख ट्रेन किलोमीटर दुर्घटना की दर 0.23 थी, जो साल 2014-15 में 0.10, साल 2015-16 में 0.10 और साल 2016-17 में 0.09 हो गई। रेल मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार ट्रेनों के पटरी से उतरने की बड़ी वजह “पटरी या डब्बे में खराबी” है। आलोचकों के अनुसार पटरियों की मरम्मत और डिब्बों के रखरखवा का सालाना लक्ष्य पूरा न होना दुर्घटनाओं को बढ़ावा देता है।

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