कई भतीजे लांच हो रहे हैं राजनीति में!

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भारत की राजनीति के संदर्भ में भाई भतीजावाद खूब चर्चित परंपरा है। सारे नेता अपने भाई भतीजों को आगे बढ़ाते हैं और बाद में अपने बेटे-बेटियों को अपनी विरासत सौंप देते हैं। महाराष्ट्र में यह सबसे ज्यादा हुआ। बाल ठाकरे, शरद पवार और गोपीनाथ मुंडे तीनों के भतीजे ज्यादा सक्रिय थे और अच्छे नेता थे, लेकिन अंततः तीनों की विरासत उनके बेटे-बेटियों के हाथ गई है। इसी तरह बिहार में रामविलास पासवान के दोनों भाई उनके साथ राजनीति करते रहे, लेकिन अंततः पासवान ने बेटे चिराग को विरासत सौंपी है। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह ने भी अपने भाई शिवपाल यादव के साथ ऐसा ही किया।

लेकिन अब कुछ भतीजों को बड़े नेताओं की राजनीतिक विरासत मिलने वाली है। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में तीन भतीजे जल्दी ही राजनीतिक विरासत संभालने वाले हैं। यह संयोग है कि तीन बड़े नेता, जो भतीजों को अपनी विरासत देंगे, वे तीनों अविवाहित हैं या उनके अपने बच्चे नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में मायावती, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और ओड़िशा में नवीन पटनायक अपने भतीजों को विरासत सौंपेंगे।

मायावती अपने भतीजे आकाश को 18 सितंबर को लांच करने वाली हैं। लंदन से प्रबंधन की पढ़ाई पूरी करने के बाद आकाश राजनीतिक जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं। हालांकि मायावती के पास अभी उनको देने के लिए राज्यसभा, विधानसभा सभा या विधान परिषद की सीट नहीं है। लेकिन वे उनको मेरठ की अपनी रैली में लांच करेंगी और संगठन में कोई बड़ा पद देंगी।

ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राजनीति में लांच कर दिया है। वे लोकसभा के सांसद हैं और पार्टी का कामकाज संभाल रहें हैं। वे कई राजनीतिक विवादों और कानूनी पचड़ों में भी फंसे हैं। कहा जा रहा है कि अगले चुनाव से पहले ममता उनको पार्टी की कमान पूरी तरह से सौंप सकती हैं। ओड़िशा में नवीन पटनायक सेहत के आधार पर रिटायर होने वाले हैं। हालांकि जब भी उनके रिटायर होने की बात चलती है, उनकी पार्टी में कोई न कोई विवाद हो जाता है और उनकी रिटायरमेंट रूक जाती है। बहरहाल, चर्चा है कि वे अपने बड़े भाई प्रेम पटनायक के बेटे अरुण को वे राजनीति में उतार सकते हैं। अरुण पटनायक के अलावा नवीन पटनायक की बहन गीता मेहता के भी सक्रिय राजनीति में आने की संभावना है।

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