बिहार में राज्यसभा चुनाव: जोड़ तोड़ शुरू

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बिहार प्रदेश कांग्रेस में घमासान मचा है। पार्टी के 27 में 18-19 विधायक बागी तेवर दिखा रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस के विधायक भाजपा और जनता दल यू दोनों के संपर्क में हैं। सरकार में शामिल दोनों पार्टियां कांग्रेस की टूट फूट का फायदा उठाने की योजना पर काम कर रही हैं। कांग्रेस के टूटने का फायदा अगले साल होने वाले राज्यसभा चुनाव में दिखेगा। अगर भाजपा कुछ विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर लेती है तो वह राज्यसभा की अपनी दो सीटें बचा लेगी। अगले साल बिहार से राज्यसभा की छह सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से चार सीटें जनता दल यू की हैं और दो भाजपा की। भाजपा के दो बड़े केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और धर्मेंद्र प्रधान रिटायर हो रहे हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 35 विधायकों की जरूरत है। फिलहाल भाजपा विधायकों की संख्या 53 है। उसकी तीन सहयोगी पार्टियों लोजपा, रालोसपा और हम की पांच सीटें हैं। यानी अगर उसे 12 और विधायकों का समर्थन मिले तो वह दूसरी सीट जीत सकती है। चर्चा है कि कांग्रेस के कई सवर्ण विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। दूसरी ओर जनता दल यू के विधायकों की संख्या 71 है और वह अपने दम पर दो सीटें जीत सकती है। अगर कांग्रेस के विधायक टूट कर जदयू में भी जाते हैं तब भी एनडीए के एक साझा उम्मीदवार को राज्यसभा में भेजा जा सकता है। कांग्रेस को उम्मीद है कि पार्टी एकजुट रह गई तो उसको राज्यसभा की एक सीट मिल जाएगी। कांग्रेस के 27 विधायक हैं और उसकी सहयोगी लालू प्रसाद की राजद के 80 विधायक हैं। यानी राजद के दस वोट अतिरिक्त हैं, जो कांग्रेस को मिल सकते हैं। तभी इस समय लालू प्रसाद से अलग होने की बात करने वाले प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की मंशा पर सवाल खड़े हुए हैं। 19 विधायकों ने अलग होने की बात कही है, जबकि उनको पता है कि उनकी इस मांग से पार्टी को नुकसान होगा।

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