दहेज प्रताड़ना के मामले पुलिस थानों मेें नहीं होंगे दर्ज, ना गिरफ्तारी होगी

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पाली| सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर अब पुलिस सीधे दहेज प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज नहीं कर पाएगी। साथ ही पति, ननद, सास या ससुर की गिरफ्तारी भी नहीं होगी। अब ऐसे मामलों की पहले फैमिली वेलफेयर कमेटी सुनवाई करेगी। कमेटी के निर्णय के बाद एफआईआर होगी और पुलिस जांच शुरू कर सकेगी। हालांकि इसके बावजूद पुलिस किसी को गिरफ्तार नहीं करेगी। जांच में दोषी पाए जाने पर पुलिस पति अन्य आरोपियों को सिर्फ पाबंद करेगी। पुलिस मामले की जांच करके कोर्ट में चालान पेश करेगी तब पाबंदशुदा व्यक्ति कोर्ट में पेश किया जाएगा। पहले पति अन्य की गिरफ्तारी होने के बाद दोनों परिवारों में राजीनामे की सभी संभावनाएं खत्म हो जाती थी। अब यह प्रयास किया जा रहा है कि परिवार किसी भी वजह से टूटने की बजाए जुड़े रहें। पहले कई बार परिजनों से जरा सी लड़ाई कहासुनी के मामलों में भी दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करा दिया जाता है। कई बार पूरे परिवार को जेल की हवा तक खानी पड़ती थी और जांच के बाद अधिकांश मामलों में पुलिस बाद में एफआर लगा देती थी।
पहले यह चलता था थानों में
इसआदेश के पहले कोई भी महिला थाने में जाकर मुकदमा दर्ज करवाती थी तो पुलिस आईपीसी की धारा 498 और 406 के तहत मुकदमा दर्ज कर लेती थी। एफआईआर के बाद पुलिस आरोपियों की सूची में लिखवाए गए पूरे परिजनों को गिरफ्तार करती थी। उनको गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जाता था। अब ऐसा नहीं हो सकेगा। फिलहाल कमेटियों के गठन नहीं हुआ है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नई व्यवस्था को शीघ्र ही जिले में लागू करने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है।
फैमिली वेलफेयर कमेटी में सुनवाई के बाद ही होगी आगे की कार्रवाई
सुप्रीमकोर्ट ने राजेश अन्य बनाम यूपी सरकार के एक मामले में फैसला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के पूर्व दोनों पक्षों में विस्तार से राजीनामे की संभावनाएं तलाशनी चाहिए। दोनों में बातचीत करवानी चाहिए। कोर्ट ने माना कि परिवार के किसी भी सदस्य की गिरफ्तारी के बाद राजीनामे की हर संभावना खत्म हो जाती है।
जिले में हर माह 15 मुकदमे, ज्यादातर इस्तगासे से
जिले में हर महीने करीब 15 मुकदमे महिला प्रताड़ना के संबंध में दर्ज हो रहे हैं। जिसमें 5 से 7 मामले खुद पुलिस दर्ज करती है और बाकी मामले कोर्ट इस्तगासे के आधार पर दर्ज होते हैं। पुलिस का कहना है कमेटी गठित होने के बाद भी कोर्ट इस्तगासे के मुकदमे तो दर्ज होंगे।

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