नए और जमीनी नेताओं पर मोदी की नजर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2014 में अपनी सरकार बनाने के समय से ही पार्टी के स्थापित नेताओं और राज्यों में जमीनी स्तर पर काम कर रहे नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी के पुराने नेताओं और पहले अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे नेताओं को भी सरकार में जगह दी तो बिल्कुल नए चेहरे भी राज्यों से लेकर आए। उन्होंने बाद में की गई तीन फेरबदल में भी इसका ध्यान रखा। उन्होंने कई ऐसे नेताओं को दिल्ली में मंत्री बनाया, जिनको उनके राज्य और यहां तक कि चुनाव क्षेत्र से बाहर भी कम ही लोग जानते थे। उनके मंत्री बनने के बाद पत्रकारों को भी उनके बारे में जानने के लिए गूगल का सहारा लेना पड़ा।

इस बार भी प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के खटिक समाज के नेता डॉक्टर वीरेंद्र कुमार को मंत्री बनाया है। वे कई बार सांसद रहे हैं और जमीनी स्तर पर काम करते हैं। उनसे पहले प्रभात झा से लेकर प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह तक के नाम की चर्चा थी, जो प्रदेश में पहले स्थापित नेता हैं। इसी तरह कर्नाटक से शोभा करंदलाजे से लेकर प्रहलाद जोशी और सुरेश अंगदी के नाम की चर्चा थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने अनंत हेगड़े को मौका दिया। ऐसे ही राजस्थान से गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश से शिव प्रताप शुक्ल को मौका दिया गया।

इससे पहले की फेरबदल में तो प्रधानमंत्री मोदी ने और चौंकाया था। उन्होंने महाराष्ट्र से डॉक्टर सुभाष रामाराव भामरे को मंत्री बनाने के लिए चुना। इसी तरह उन्होंने कर्नाटक से कई हाई प्रोफाइल नेताओं को छोड़ कर रमेश जिगाजिनागी को मंत्री बनाया। उत्तर प्रदेश से भी कृष्णा राज को मंत्री बनाया गया था, तब कई लोग बहुत चौंके थे। ऐसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राज्य गुजरात से जसवंत सिंह सुमनभाई भभोर को मंत्री बना कर सबको हैरान कर दिया था। उन्होंने उत्तराखंड से अजय टम्टा, झारखंड से सुदर्शन भगत, राजस्थान से छोटू राम चौधरी आदि को चुन कर मंत्री बनाया।

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