दो मंत्रियों के लिए राज्यसभा की जरूरत!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में नौ नए मंत्री शामिल किए गए हैं। इनमें से एक शिव प्रताप शुक्ल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य हैं और छह मंत्री लोकसभा के सदस्य हैं। दो ऐसे मंत्रियों ने शपथ ली है, जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी अल्फोंस कननथानम और पूर्व आईएफएस अधिकारी हरदीप सिंह पुरी सांसद नहीं हैं। संवैधानिक प्रावधानों के तहत इन दोनों मंत्रियों को छह महीने के अंदर राज्यसभा सदस्य बनना होगा। राज्यसभा का अगला दोवार्षिक चुनाव मार्च में होगा और अप्रैल में नए सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी। परंतु इन दोनों सांसदों को तीन मार्च से पहले ही राज्यसभा के लिए चुना जाना होगा। सो, ये दो सीटों के लिए अगले कुछ दिन में होने वाले उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार होंगे। राजस्थान में राज्यसभा की एक सीट खाली हो गई है। वेंकैया नायडू के उप राष्ट्रपति चुने जाने की वजह से यह सीट खाली हुई है। अल्फोंस या पूरी में से किसी एक को राजस्थान से राज्यसभा में लाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के इस्तीफे से एक सीट खाली हुई है और दूसरी सीट गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के इस्तीफे से खाली होने वाली है। इसमें मायावती वाली सीट का कार्यकाल सिर्फ सात महीने बचा है इसलिए उस पर उपचुनाव नहीं होगा। लेकिन पर्रिकर वाली सीट का कार्यकाल 2020 तक है। सो, इन दोनों मंत्रियों में से एक मंत्री उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का सदस्य चुना जाएगा। राज्यसभा की एक सीट तेलंगाना में भी खाली है, लेकिन वह भाजपा को नहीं मिल सकती है। वैसे राजस्थान और उत्तर प्रदेश में लोकसभा की भी तीन सीटें खाली हो गई हैं या होने वाली हैं। राजस्थान में सांवरलाल जाट के निधन से एक सीट खाली हुई है और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से दो सीटें खाली होने वाली हैं। लेकिन इन दोनों पूर्व अधिकारियों को लोकसभा चुनाव नहीं लड़ाया जा सकता है।

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