…तो इन कारणों से मोदी के 6 मंत्रियों ने दिया इस्तीफा!

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रविवार को कैबिनेट में होने वाले बड़े फेरबदल से पहले एक के बाद एक छह मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं. इन इस्तीफों के पीछे कई अटकलें लगाई जा रही हैं. इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में सबसे पहला नाम राजीव प्रताप रूडी का है. रूडी ने इस्तीफा क्यों दिया इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं. सूत्रों के मुताबिक वह पीएम और आलाकमान की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए. इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि पीएम के विजन स्किल इंडिया को कौशल विकास मंत्रालय से खास परिणाम नहीं मिले. जेडीयू के एनडीए में शामिल होने के बाद मंत्रिमंडल में बिहार बीजेपी मंत्रियों का कोटा कम करना भी इस्तीफे की बड़ी वजह हो सकती है. हालांकि, इस्तीफे के बाद राजीव प्रताप रूडी का रोल क्या होगा…? इस बाबत कहा जा रहा है कि आगामी चुनाव से पहले उन्हें संगठन में जगह मिल सकती है. इसके अलावा बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका बढ़ाए जाने के भी आसार हैं. कलराज मिश्र के इस्तीफे की वजह उनके अधिक उम्र को माना जा रहा है. पार्टी गतिविधियों में बड़ी भूमिका न होना भी इसका कारण हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक यूपी चुनाव के बाद सरकार की प्राथमिकता में प्रदेश नहीं है. कहा जा रहा है कि वो मंत्रालय को अपेक्षित गति नहीं दे पाए. सूत्रों की मानें तो वो 2019 के चुनावों के लिए प्रभावी चेहरा नहीं हैं. संजीव कुमार बाल्यान भी उन मंत्रियों में शुमार हैं जो मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं. उनके इस्तीफे की बड़ी वजह यूपी चुनाव के बाद मंत्रियों का कोटा कम होना बताया जा रहा है. यह भी कहा जा रहा है कि बाल्यान के कामकाज से प्रधानमंत्री असंतुष्ट थे. सूत्रों के मुताबिक उन्हें पार्टी संगठन में जगह मिल सकती है. इसके अलावा उन्हें जाटों की राजनीति में बड़ी भूमिका मिलने के भी आसार हैं. फग्गन सिंह कुलस्ते भी केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे चुके हैं. कहा जा रहा है पीएम मोदी उनके प्रदर्शन से खुश नहीं थे. इसके अलावा ये भी कहा जा रही है कि बतौर मंत्री वो संगठन के कामों में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पाए. अब उन्हें पार्टी के वरिष्ठ आदिवासी नेता का दर्जा मिल सकता है. अगले साल एमपी छत्तीसगढ़ चुनाव में भी वो बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. मध्य प्रदेश पार्टी संगठन में भी उन्हें बड़ी भूमिका मिल सकती है. श्रम एवं रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने भी इस्तीफा दे दिया है. बढ़ती उम्र को उनके इस्तीफे की वजह बताया जा रहा है. इसके अलावा उनके प्रदर्शन पर भी हमेशा से सवाल उठते रहे हैं. ये भी कहा जा रहा है कि मंत्रालय का फीडबैक संघ के मुताबिक नहीं था जो उनके इस्तीफे की वजह बना. गौरतलब है कि अमित शाह के मिशन साउथ में तेलंगाना सबसे आगे है. दत्तात्रेय को तेलंगाना में बड़ी भूमिका मिल सकती है. महेंद्र नाथ पाण्डेय को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. कहा जा रहा है कि पाण्डेय मंत्री के तौर पर प्रभावी नहीं थे. सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला अपनाते हुए उनसे इस्तीफा मांगा. हालांकि उन्हें यूपी का बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है. 2019 के चुनावों के लिए यूपी एक अहम राज्य है. पाण्डेय को पार्टी संगठन का प्रभावशाली नेता माना जाता है.

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