ओझल ‘सरस्वती’ की खोज में जैसलमेर पहुंची हरियाणा-राजस्थान की संयुक्त टीम

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जैसलमेर। काल के प्रवाह को दौरान लुप्त हुई वैदिक काल की सरस्वती नदी की पुनः खोज के लिए केंद्र सरकार के अंतर्गत अध्ययन दल ने जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया। जैसलमेर हरियाणा सरस्वती हेरिटेज डवलपमेंट बोर्ड की टीम और राजस्थान सरकार के भूजल टीम ने जैसलमेर जिले के सीमावर्ती गांवों में सरस्वती नदी की विजिबिलिटी सहित अन्य संभावनाएं तलाशी। गौरतलब है कि किसी जमाने में सरस्वती नदी जैसलमेर जिले से बहती थी और पूर्व में इस नदी की खोज के लिए कई सर्वे हो चुके हैं। केन्द्र सरकार ने भी इसका एक प्रोजेक्ट तैयार किया था। फिलहाल हरियाणा सरकार का एक प्रोजेक्ट युद्धस्तर पर चल रहा है।

हरियाणा बोर्ड के डिप्टी प्रेसिडेंट प्रशांत भारद्वाज के नेतृत्व में टीम ने सीमावर्ती रणाऊ, तनोट, किशनगढ़, कुरिया बेरी व धरमी कुआ क्षेत्र में सर्वे कर डाटा कलेक्शन किया। टीम ने यहां सरस्वती नदी की विजिबिलिटी भी जांची। अब इस टीम द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की जाकर हरियाणा सरकार को सौंपी जाएगी। इस टीम में भूजल विभाग राजस्थान सरकार के मुख्य अभियंता सूरजभानसिंह, हरियाणा सिंचाई विभाग के एसई अरविंद कोशिक, तकनीकी कंसलटेंट आदित्य व जैसलमेर के वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक एन.डी इणखिया भी शामिल थे।

प्रशांत भारद्वाज ने बताया कि हरियाणा सरकार ने 2014 में यह प्रोजेक्ट शुरू किया था। 21 अप्रैल 2015 को हमने सारे रिकार्ड व डाटा कलेक्शन कर सरस्वती नदी की खोज शुरू कर दी। हमारे पास इसरो, ओएनजीसी, राजस्थान व हरियाणा के भूजल विभाग के साथ जियोलॉजिकल स्टडी और वैज्ञानिक सबूत भी है। उन्होंने बताया कि यह नदी हरियाणा के साथ साथ राजस्थान व गुजरात भी में बहती थी। ऐसे में अब यहां की सरकारों को भी इस प्रोजेक्ट में साथ जुड़ने की जरूरत है। केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने भी यही कहा था।

भारद्वाज ने बताया कि यह बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है और हमारी संस्कृति, सभ्यता व धरोहर से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में हमारे पास 5 हजार से 18 से 20 हजार साल पुराने फॉसिल्स उपलब्ध है। यह प्रोजेक्ट का भविष्य जल प्रबंधन व हेरिटेज टूरिज्म के तौर पर देखा जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि सरस्वती नदी के प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान सरकार कम रूचि दिखा रही है, जबकि हरियाणा सरकार ने इसका बोर्ड गठित कर सर्वे शुरू कर दिया है। जून 2015 में तत्कालीन पीएचईडी मंत्री किरण माहेश्वरी ने कहा था कि सरस्वती नदी राजस्थान सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। उस दौरान डीपीआर भी तैयार हो गई थी और पहला फेज 80 करोड़ था। उन्होंने कहा था कि यदि साल के अंत तक केन्द्र से बजट नहीं मिला तो राजस्थान सरकार बजट देगी और प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।

राजस्थान सरकार के भूजल विभाग के मुख्य अभियनता सूरजभानसिंह ने बताया की सरस्वती नदी का परवाह क्षेत्र में हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर होते हुए गुजरात कच्छ के रास्ते तक पहुंचता है। उन्होंने बताया कि अध्ययन दल ने पुराने अध्यनों के निष्कर्षों को शामिल करते मौजूद समय में जो खोजबीन की है, उससे इतना साफ़ है कि सरस्वती के चैनल्स के पुनःजीवित होने से संबंधित क्षेत्रों में आगामी 20 साल से 30 साल तक पीने के पानी का बंदोबस्त हो जाएगा।

आपको बता दें कि जैसलमेर जिले से सरस्वती नदी के जुड़ाव को लेकर साक्ष्य मिल चुके हैं तथा उन पर आगे समग्र अनुसंधान से इस जिले के कायाकल्प होने की भी आशाएं संजोई गई थी। जानकारों की मानें तो जैसलमेर के लाठी क्षेत्र में भूगर्भीय मीठा पानी सरस्वती नदी के चैनल की वजह से ही प्राप्त होता रहा है। केंद्र सरकार के पास जैसलमेर जिले में सरस्वती नदी के बहाव क्षेत्र का पूरा नक्शा तैयार है। यदि जिले के मौजूदा नक्शे को उस चैनल के नक्शे पर रखकर देखा जाए तो भावी संभावनाओं की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।

ये है सरस्वती नदी का रूट :

  • सरस्वती नदी की लंबाई करीब 1400 किमी से ज्यादा थी।
  • हरियाणा में 550 किमी, राजस्थान में 600 और गुजरात में 300 किमी।
  • इस नदी की चौड़ाई 3 से 8 किमी थी।
  • सरस्वती नदी का उद्गम स्थल हरियाणा है।
  • हरियाणा से राजस्थान के गंगानगर व हनुमान जिले में प्रवेश करते हुए यह नदी पाकिस्तान में चली जाती थी।
  • पाकिस्तान से वापस जैसलमेर के रास्ते राजस्थान में प्रवेश करती थी।
  • पाकिस्तान से किशनगढ़ के रास्ते जैसलमेर में प्रवेश है। इसके बाद यह नदी गुजरात तक जाती थी।
  • किशनगढ़, धरमी कुआ, रणाऊ, कुरिया बेरी आदि इलाकों में इस नदी के सुराग भी मिल चुके हैं।

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