तो यह विपक्ष से लड़ने की तैयारी

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भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक हो रहे विपक्ष और मीडिया से मुकाबले की तैयारी शुरू कर दी है। असल में इसकी शुरुआत भी भाजपा ने ही की है। भाजपा ने समय से बहुत पहले आम चुनाव का बिगुल बजा दिया। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के वरिष्ठ नेताओं के साथ रणनीतिक बैठक और साढ़े तीन सौ सीटों का लक्ष्य तय करने की खबर आई। भाजपा की इस तैयारी से विपक्ष के कान खड़े हुए और उधर भी चुनावी तैयारी शुरू हो गई।

गौरतलब है कि आम चुनाव में अभी डेढ़ साल से ज्यादा समय बाकी है। आमतौर पर सरकार के आखिरी बजट पेश करने के बाद चुनावी तैयारी तेज होती है। परंतु भाजपा की सरकार ने चौथे बजट के बाद ही चुनावी तैयारी शुरू कर दी। इसका नतीजा यह हुआ है कि विपक्ष आक्रामक हो गया है और आमतौर पर सरकार के साथ चल रहा मीडिया भी चुनावी नजरिए से खबरों को कवर करने लगा है। सो, अब भाजपा को एक मजबूत टीम की जरूरत है, जो विपक्ष का जवाब दे और मीडिया में पार्टी व सरकार का मजबूती से बचाव करे। भाजपा को राज्यों में भी मजबूत नेताओं की जरूरत है, तभी मोदी सरकार के कुछ मंत्रियों का इस्तीफा करा कर राज्यों में भेजने की चर्चा है।

तभी नरेंद्र मोदी की सरकार के कुछ तेज तर्रार मंत्रियों को संगठन में लाने की तैयारी है। कम से कम उमा भारती, राजीव प्रताप रूड़ी और निर्मला सीतारमण के इस्तीफे को तो इस तैयारी के साथ ही जोड़ देखा जा रहा है। ये तीनों भाजपा के सबसे बेहतरीन प्रवक्ताओं में से रहे हैं। अंग्रेजी और हिंदी दोनों मीडिया में एक समान दक्षता के साथ पार्टी का पक्ष रखते हैं। तभी कहा जा रहा है कि मंत्रिमंडल से हटने के बाद इन को महासचिव बना कर राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी जा सकती है। उमा भारती को मध्य प्रदेश, निर्मला सीतारमण को तमिलनाडु में और रूड़ी को बिहार में प्रोजेक्ट करने की भी चर्चा है। भाजपा के जानकार सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं खास कर गोरखपुर में बच्चों की मौत, डेरा सच्चा सौदा प्रकरण, नोटबंदी के आंकड़े आदि के बाद सरकार के प्रति विपक्ष की आक्रामकता बढ़ी है, आम लोगों का नजरिया बदला है और मीडिया की कवरेज भी बदली है। इसलिए भाजपा को अब संगठन में अच्छे लोगों को लाने और सरकार में भी तेज तर्रार मंत्रियों की जरूरत बढ़ी है।

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