अगले आम चुनाव तक की टीम

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New Delhi: Prime Minister Narendra Modi after inaugurating an exhibition titled “Swachchhagrah – Bapu Ko Karyanjali - Ek Abhiyan, Ek Pradarshani” organised to mark the 100 years of Mahatma Gandhi’s 'Champaran Satyagraha' at the National Archives of India in New Delhi on Monday. PTI Photo by Shahbaz Khan(PTI4_10_2017_000271A)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैसे तो तीसरी बार अपनी कैबिनेट में फेरबदल करने जा रहे हैं, लेकिन इस बार की फेरबदल पहले से अलग है। इस बार 2019 के आम चुनाव को ध्यान में रख कर सरकार में बदलाव किया जा रहा है। तभी यह बहुत अहम है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को बहुत माथापच्ची करनी पड़ी है। यह पहला मौका है, जब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह एक हफ्ते तक दिल्ली में डेरा डाले रहे। तमिलनाडु की यात्रा रद्द करने के बाद वे बीच में एक दिन के लिए मुंबई गए थे, लेकिन उसके बाद लगातार दिल्ली में हैं और सरकार व संगठन में बेहतर तालमेल के लिए पार्टी नेताओं के साथ विचार विमर्श करते रहे।

भाजपा के जानकार सूत्रों का कहना है कि इस बार की फेरबदल में राज्यों का, जातियों और अनुभव का तालमेल बैठाने के लिए इतनी मशक्कत करनी पड़ी है। ध्यान रहे प्रधानमंत्री की योजना अगर आगे बढ़ती है तो इस बार लोकसभा के साथ साथ कई राज्यों के चुनाव भी हो सकते हैं। इसमें महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और हरियाणा शामिल हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओड़िशा के चुनाव तो लोकसभा के साथ होंगे ही।

तभी कहा जा रहा है कि ओड़िशा में पार्टी का चेहरा बनाए जा रहे धर्मेंद्र प्रधान को तरक्की मिल सकती है तो सरकार में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। विनय सहस्त्रबुद्धे को मंत्री बनाया जा सकता है और पीयूष गोयल को प्रमोशन देकर कैबिनेट का दर्जा दिया जा सकता है। पहले प्रकाश जावडेकर के संगठन में जाने की चर्चा थी, लेकिन वे सरकार में ही रहेंगे। बिहार भाजपा की नई सहयोगी जनता दल यू के दो नेता आरसीपी सिंह और संतोष कुशवाहा को मंत्री बनाया जाएगा तो इसी तरह अन्ना डीएमके के भी दो वरिष्ठ नेता वी मैत्रेयन और थंबीदुरैई को मंत्री बनाने की चर्चा है।

प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इस बार जो टीम बनाएंगे, वह अगला लोकसभा चुनाव लड़ाने वाली होगी। इसलिए केंद्र सरकार और केंद्रीय संगठन में राज्यों का बराबर संतुलन बनाने का प्रयास किया जाएगा और साथ ही राज्यों में पेश किए जाने वाले चेहरे भी इसी समय निकाले जाएंगे। जेपी नड्डा, निर्मला सीतारमण, उमा भारती, राजीव प्रताप रूड़ी, धर्मेंद्र प्रधान आदि चेहरे इस लिहाज से बेहद अहम हैं।

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