कांग्रेस के क्षत्रपों की बगावत

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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह क्या उसी रास्ते पर चल रहे हैं, जो रास्ता शंकर सिंह वाघेला ने दिखाया है? इस पर कांग्रेस के एक जानकार अनुभवी नेता का कहना है कि कांग्रेस में यह रास्ता वाघेला नहीं दिखाया है, बल्कि कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने दिखाया है। उन्होंने जिस अंदाज में कांग्रेस आलाकमान को आंखें दिखा कर पंजाब की कमान अपने हाथ में ली और राहुल गांधी के करीबी प्रताप सिंह बाजवा को किनारे किया, उससे कांग्रेस के बाकी सभी क्षत्रपों को प्रेरणा मिली है।

हैरानी नहीं है कि वीरभद्र सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के करीबी रिश्तेदार हैं। दोनों समधी हैं। इसलिए कुछ जानकारों का मानना है कि वीरभद्र सिंह ने कैप्टेन से प्रेरणा ली है और कांग्रेस आलाकमान को दो टूक चेतावनी दी है कि प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खु को बदलो नहीं तो हम न तो चुनाव लड़ेंगे और न पार्टी का नेतृत्व करेंगे। वीरभद्र को पता है कि मौजूदा स्थिति में कांग्रेस आलाकमान के पास विकल्प नहीं है। वह उनसे मोलभाव करेगी और इस मोलभाव में वे अपनी पत्नी और अपने बेटे के लिए कोई बेहतर सौदा पटा लेंगे। वाघेला का मामला संभालने में विफल रहे अहमद पटेल की इस मामले में परीक्षा होनी है।

शंकर सिंह वाघेला ने भी कांग्रेस आलाकमान से यहीं मांग की थी। उन्होंने कहा थी पार्टी के चुनाव अभियान की पूरी कमान उनके हाथ में हो और उनके करीबी एक सौ लोगों को टिकट दी जाए। कांग्रेस ने इसे एक झटके में खारिज कर दिया। वे ज्यादा मोलभाव इसलिए नहीं कर पाए क्योंकि कांग्रेस में उनकी जड़ें नहीं थीं और प्रदेश में कांग्रेस के पास दूसरा नेतृत्व था। लेकिन हिमाचल प्रदेश की स्थिति अलग है। वहां वीरभद्र अकेले नेता हैं। सीबीआई, आय कर विभाग और ईडी ने उनको जिस तरह परेशान किया है, इससे उनके प्रति सहानुभूति भी है। तभी चुनाव लड़ने का इरादा छोड़ चुके वीरभद्र एक बार फिर किस्मत आजमाने को तैयार हैं।

बगावती तेवर दिखा रहे अगले क्षत्रप हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा हैं। वे भी प्रदेश में पार्टी की कमान अपने हाथ में चाहते हैं नहीं तो उनके समर्थकों ने कहना शुरू कर दिया है कि वे अलग पार्टी बना लेंगे। कहा जा रहा है कि अगर वे अलग पार्टी बनाते हैं तो कांग्रेस एक दर्जन विधायक उनके साथ चले जाएंगे और पार्टी के पास सिर्फ दो विधायक बचेंगे। शरद पवार से लेकर ममता बनर्जी और अजित जोगी, जगन मोहन रेड्डी से लेकर वाघेला तक कई क्षत्रप गवां चुकी कांग्रेस वीरभद्र और हुड्डा दोनों को रोकने का प्रयास करेगी।

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